श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

तस्य दृग्भ्योऽभवत् पुत्रः सोमोऽमृतमयः किल।

विप्रौषध्युडुगणानां ब्रह्मणा कल्पितः पतिः॥ ३

tasya dṛgbhyo'bhavat putraḥ somo'mṛtamayaḥ kila|

viprauṣadhyuḍugaṇānāṃ brahmaṇā kalpitaḥ patiḥ|| 3

अर्थ

उन्हीं अत्रिके नेत्रोंसे अमृतमय चन्द्रमाका जन्म हुआ। ब्रह्माजीने चन्द्रमाको ब्राह्मण, ओषधि और नक्षत्रोंका अधिपति बना दिया॥ ३॥

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