श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.2

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

सहस्रशिरसः पुंसो नाभिह्रदसरोरुहात्।

जातस्यासीत् सुतो धातुरत्रिः पितृसमो गुणैः॥ २

sahasraśirasaḥ puṃso nābhihradasaroruhāt|

jātasyāsīt suto dhāturatriḥ pitṛsamo guṇaiḥ|| 2

अर्थ

सहस्रों सिरवाले विराट् पुरुष नारायणके नाभि-सरोवरके कमलसे ब्रह्माजीकी उत्पत्ति हुई। ब्रह्माजीके पुत्र हुए अत्रि। वे अपने गुणोंके कारण ब्रह्माजीके समान ही थे॥ २॥

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