श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ममायं न तवेत्युच्चैस्तस्मिन् विवदमानयोः।

पप्रच्छुर्ऋषयो देवा नैवोचे व्रीडिता तु सा॥ ११✎ 1133 1134

mamāyaṃ na tavetyuccaistasmin vivadamānayoḥ|

papracchur:ṛṣayo devā naivoce vrīḍitā tu sā|| 11

अर्थ

अब वे एक-दूसरेसे इस प्रकार जोर-जोरसे झगड़ा करने लगे कि ‘यह तुम्हारा नहीं, मेरा है।’ ऋषियों और देवताओंने तारासे पूछा कि ‘यह किसका लड़का है।’ परन्तु ताराने लज्जावश कोई उत्तर न दिया॥ ११॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1133 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पप्रच्छुऋर्षयो → पप्रच्छुऋर्ऋषयो
  • #1134 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पप्रच्छुऋर्ऋषयो → पप्रच्छुर्ऋषयो

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें