अपने पतिकी बात सुनकर तारा अत्यन्त लज्जित हुई। उसने सोनेके समान चमकता हुआ एक बालक अपने गर्भसे अलग कर दिया। उस बालकको देखकर बृहस्पति और चन्द्रमा दोनों ही मोहित हो गये और चाहने लगे कि यह हमें मिल जाय॥ १०॥
तत्याज व्रीडिता तारा कुमारं कनकप्रभम्।
स्पृहामांगिरसश्चक्रे कुमारे सोम एव च॥ १०
अपने पतिकी बात सुनकर तारा अत्यन्त लज्जित हुई। उसने सोनेके समान चमकता हुआ एक बालक अपने गर्भसे अलग कर दिया। उस बालकको देखकर बृहस्पति और चन्द्रमा दोनों ही मोहित हो गये और चाहने लगे कि यह हमें मिल जाय॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.14.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 70) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/14/10/