श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.10

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

तत्याज व्रीडिता तारा कुमारं कनकप्रभम्।

स्पृहामांगिरसश्‍चक्रे कुमारे सोम एव च॥ १०

tatyāja vrīḍitā tārā kumāraṃ kanakaprabham|

spṛhāmāṃgirasaścakre kumāre soma eva ca|| 10

अर्थ

अपने पतिकी बात सुनकर तारा अत्यन्त लज्जित हुई। उसने सोनेके समान चमकता हुआ एक बालक अपने गर्भसे अलग कर दिया। उस बालकको देखकर बृहस्पति और चन्द्रमा दोनों ही मोहित हो गये और चाहने लगे कि यह हमें मिल जाय॥ १०॥

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