श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.50

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

एवं कृतशिरःस्नानः सुवासाः स्रग्व्यलंकृतः।

स्वलंकृतैः सुवासोभिर्भ्रातृभिर्भार्यया बभौ॥ ५०

evaṃ kṛtaśiraḥsnānaḥ suvāsāḥ sragvyalaṃkṛtaḥ|

svalaṃkṛtaiḥ suvāsobhirbhrātṛbhirbhāryayā babhau|| 50

अर्थ

इस प्रकार सिरसे स्नान करके भगवान् श्रीरामने सुन्दर वस्त्र, पुष्पमालाएँ और अलंकार धारण किये। सभी भाइयों और श्रीजानकीजीने भी सुन्दर-सुन्दर वस्त्र और अलंकार धारण किये। उनके साथ भगवान् श्रीरामजी अत्यन्त शोभायमान हुए॥ ५०॥✎ 1639

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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