श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.7

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

श्रूयतां मानवो वंशः प्राचुर्येण परंतप।

न शक्यते विस्तरतो वक्तुं वर्षशतैरपि॥ ७

śrūyatāṃ mānavo vaṃśaḥ prācuryeṇa paraṃtapa|

na śakyate vistarato vaktuṃ varṣaśatairapi|| 7

अर्थ

श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! तुम मनुवंशका वर्णन संक्षेपसे सुनो। विस्तारसे तो सैकड़ों वर्षमें भी उसका वर्णन नहीं किया जा सकता॥ ७॥

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