श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.38

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तुष्टस्तस्मै स भगवानृषये प्रियमावहन्।

स्वां च वाचमृतां कुर्वन्‍निदमाह विशाम्पते॥ ३८

tuṣṭastasmai sa bhagavānṛṣaye priyamāvahan|

svāṃ ca vācamṛtāṃ kurvannidamāha viśāmpate|| 38

अर्थ

भगवान् शंकर वसिष्ठजीपर प्रसन्‍न हुए। परीक्षित्! उन्होंने उनकी अभिलाषा पूर्ण करनेके लिये अपनी वाणीको सत्य रखते हुए ही यह बात कही—॥ ३८॥

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