श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.37

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

स तस्य तां दशां दृष्ट्वा कृपया भृशपीडितः।

सुद्युम्‍नस्याशयन् पुंस्त्वमुपाधावत शंकरम्॥ ३७

sa tasya tāṃ daśāṃ dṛṣṭvā kṛpayā bhṛśapīḍitaḥ|

sudyumnasyāśayan puṃstvamupādhāvata śaṃkaram|| 37

अर्थ

सुद्युम्‍नकी यह दशा देखकर वसिष्ठजीके हृदयमें कृपावश अत्यन्त पीड़ा हुई। उन्होंने सुद्युम्‍नको पुनः पुरुष बना देनेके लिये भगवान् शंकरकी आराधना की॥ ३७॥

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