श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.31

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ऋषयोऽपि तयोर्वीक्ष्य प्रसंगं रममाणयोः।

निवृत्ताः प्रययुस्तस्मान्‍नरनारायणाश्रमम्॥ ३१

ṛṣayo'pi tayorvīkṣya prasaṃgaṃ ramamāṇayoḥ|

nivṛttāḥ prayayustasmānnaranārāyaṇāśramam|| 31

अर्थ

ऋषियोंने भी देखा कि भगवान् गौरी-शंकर इस समय विहार कर रहे हैं, इसलिये वहाँसे लौटकर वे भगवान् नर-नारायणके आश्रमपर चले गये॥ ३१॥ उसी समय भगवान् शंकरने अपनी प्रिया भगवती अम्बिकाको प्रसन्‍न करनेके लिये कहा कि ‘मेरे सिवा जो भी पुरुष इस स्थानमें प्रवेश करेगा, वही स्त्री हो जायेगा’॥ ३२॥ परीक्षित्! तभीसे पुरुष उस स्थानमें प्रवेश नहीं करते। अब सुद्युम्‍न स्त्री हो गये थे। इसलिये वे अपने स्त्री बने हुए अनुचरोंके साथ एक वनसे दूसरे वनमें विचरने लगे॥ ३३॥

यह व्याख्या श्लोक 9.1.31 से 9.1.33 तककी एक साथ है।

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