श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.30

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तान् विलोक्याम्बिका देवी विवासा व्रीडिता भृशम्।

भर्तुरंकात् समुत्थाय नीवीमाश्‍वथ पर्यधात्॥ ३०

tān vilokyāmbikā devī vivāsā vrīḍitā bhṛśam|

bharturaṃkāt samutthāya nīvīmāśvatha paryadhāt|| 30

अर्थ

उस समय अम्बिका देवी वस्त्रहीन थीं। ऋषियोंको सहसा आया देख वे अत्यन्त लज्जित हो गयीं। झटपट उन्होंने भगवान् शंकरकी गोदसे उठकर वस्त्र धारण कर लिया॥ ३०॥

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