श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एवं व्यवसितो राजन् भगवान् स महायशाः।

अस्तौषीदादिपुरुषमिलायाः पुंस्त्वकाम्यया॥ २१

evaṃ vyavasito rājan bhagavān sa mahāyaśāḥ|

astauṣīdādipuruṣamilāyāḥ puṃstvakāmyayā|| 21

अर्थ

परीक्षित्! परम यशस्वी भगवान् वसिष्ठने ऐसा निश्‍चय करके उस इला नामकी कन्याको ही पुरुष बना देनेके लिये पुरुषोत्तम भगवान् नारायणकी स्तुति की॥ २१॥

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