श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.7.5

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

कृतस्थानविभागास्त एवं कश्यपनन्दनाः।

ममन्थुः परमायत्ता अमृतार्थं पयोनिधिम्॥ ५

kṛtasthānavibhāgāsta evaṃ kaśyapanandanāḥ|

mamanthuḥ paramāyattā amṛtārthaṃ payonidhim|| 5

अर्थ

इस प्रकार अपना-अपना स्थान निश्चित करके देवता और असुर अमृतप्राप्तिके लिये पूरी तैयारीसे समुद्रमन्थन करने लगे॥ ५॥✎ 696

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #696 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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