श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.7.6

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

मथ्यमानेऽर्णवे सोऽद्रिरनाधारो ह्यपोऽविशत्।

ध्रियमाणो१ऽपि बलिभिर्गौरवात् पाण्डुनन्दन॥ ६

mathyamāne'rṇave so'driranādhāro hyapo'viśat|

dhriyamāṇo'pi balibhirgauravāt pāṇḍunandana|| 6

अर्थ

परीक्षित्! जब समुद्रमन्थन होने लगा, तब बड़े-बड़े बलवान् देवता और असुरोंके पकड़े रहनेपर भी अपने भारकी अधिकता और नीचे कोई आधार न होनेके कारण मन्दराचल समुद्रमें डूबने लगा॥ ६॥✎ 697 698 699 700 701

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—ऽतिबलि०।

    (मुद्रित पृष्ठ 935)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)
  • #697 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #698 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #699 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #700 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #701 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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