हमने वेद-शास्त्रोंका विधिपूर्वक अध्ययन किया है, ऊँचे वंशमें हमारा जन्म हुआ है और वीरताके बड़े-बड़े काम हमने किये हैं। हम देवताओंसे किस बातमें कम हैं?’ यह कहकर वे लोग चुपचाप एक ओर खड़े हो गये। उनकी यह मनोवृत्ति देखकर भगवान्ने मुसकराकर वासुकिका मुँह छोड़ दिया और देवताओंके साथ उन्होंने पूँछ पकड़ ली॥ ४॥✎ 696
स्वाध्यायश्रुतसम्पन्नाः प्रख्याता जन्मकर्मभिः।
इति तूष्णीं स्थितान्दैत्यान् विलोक्य पुरुषोत्तमः।
स्मयमानो विसृज्याग्रं पुच्छं जग्राह सामरः॥ ४
हमने वेद-शास्त्रोंका विधिपूर्वक अध्ययन किया है, ऊँचे वंशमें हमारा जन्म हुआ है और वीरताके बड़े-बड़े काम हमने किये हैं। हम देवताओंसे किस बातमें कम हैं?’ यह कहकर वे लोग चुपचाप एक ओर खड़े हो गये। उनकी यह मनोवृत्ति देखकर भगवान्ने मुसकराकर वासुकिका मुँह छोड़ दिया और देवताओंके साथ उन्होंने पूँछ पकड़ ली॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.7.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 935) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/7/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)