॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.7.18
निर्मथ्यमानादुदधेरभूद्विषं
महोल्बणं हालहलाह्वमग्रतः।
सम्भ्रान्तमीनोन्मकराहिकच्छपात्
तिमिद्विपग्राहतिमिङ्गिलाकुलात् ॥ १८✎ 1109
nirmathyamānādudadherabhūdviṣaṃ
maholbaṇaṃ hālahalāhvamagrataḥ|
sambhrāntamīnonmakarāhikacchapāt
timidvipagrāhatimiṅgilākulāt || 18
अर्थ
जब अजितभगवान्ने इस प्रकार समुद्र मन्थन किया, तब समुद्रमें बड़ी खलबली मच गयी। मछली, मगर, साँप और कछुए भयभीत होकर ऊपर आ गये और इधर-उधर भागने लगे। तिमि-तिमिंगिल आदि मच्छ, समुद्री हाथी और ग्राह व्याकुल हो गये। उसी समय पहले-पहल हालाहल नामका अत्यन्त उग्र विष निकला॥ १८॥✎ 705