राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! भगवान्ने क्षीरसागरका मन्थन कैसे किया? उन्होंने कच्छपरूप धारण करके किस कारण और किस उद्देश्यसे मन्दराचलको अपनी पीठपर धारण किया?॥ ११॥✎ 680681682
यथा भगवता ब्रह्मन्मथितः क्षीरसागरः।
यदर्थं वा यतश्चाद्रिं दधाराम्बुचरात्मना॥ ११
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! भगवान्ने क्षीरसागरका मन्थन कैसे किया? उन्होंने कच्छपरूप धारण करके किस कारण और किस उद्देश्यसे मन्दराचलको अपनी पीठपर धारण किया?॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.5.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 923) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/5/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)