श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.4.13

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एवं विमोक्ष्य गजयूथपमब्जनाभ-

स्तेनापि पार्षदगतिं गमितेन युक्तः।

गन्धर्वसिद्धविबुधैरुपगीयमान-

कर्माद्भुतं स्वभवनं गरुडासनोऽगात्॥ १३

evaṃ vimokṣya gajayūthapamabjanābha-

stenāpi pārṣadagatiṃ gamitena yuktaḥ|

gandharvasiddhavibudhairupagīyamāna-

karmādbhutaṃ svabhavanaṃ garuḍāsano'gāt|| 13

अर्थ

भगवान् श्रीहरिने इस प्रकार गजेन्द्रका उद्धार करके उसे अपना पार्षद बना लिया। गन्धर्व, सिद्ध, देवता उनकी इस लीलाका गान करने लगे और वे पार्षदरूप गजेन्द्रको साथ ले गरुड़पर सवार होकर अपने अलौकिक धामको चले गये॥ १३॥✎ 674

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #674 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीहरिभगवान् ने → श्रीहरिभगवान्‌ने

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