श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.4.14

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एतन्महाराज तवेरितो मया

कृष्णानुभावो गजराजमोक्षणम्।

स्वर्ग्यं यशस्यं कलिकल्मषापहं

दुःस्वप्ननाशं कुरुवर्य शृण्वताम्॥ १४

etanmahārāja taverito mayā

kṛṣṇānubhāvo gajarājamokṣaṇam|

svargyaṃ yaśasyaṃ kalikalmaṣāpahaṃ

duḥsvapnanāśaṃ kuruvarya śṛṇvatām|| 14

अर्थ

कुरुवंशशिरोमणि परीक्षित्! मैंने भगवान् श्रीकृष्णकी महिमा तथा गजेन्द्रके उद्धारकी कथा तुम्हें सुना दी। यह प्रसंग सुननेवालोंके कलिमल और दुःस्वप्नको मिटानेवाला एवं यश, उन्‍नति और स्वर्ग देनेवाला है॥ १४॥✎ 674

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #674 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीहरिभगवान् ने → श्रीहरिभगवान्‌ने

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