इसके बाद आत्माकी विस्मृति करा देनेवाली हाथीकी योनि उन्हें प्राप्त हुई। परन्तु भगवान्की आराधनाका ऐसा प्रभाव है कि हाथी होनेपर भी उन्हें भगवान्की स्मृति हो ही गयी॥ १२॥✎ 672673
आपन्नः कौञ्जरीं योनिमात्मस्मृतिविनाशिनीम्।
हर्यर्चनानुभावेन यद्गजत्वेऽप्यनुस्मृतिः॥ १२
इसके बाद आत्माकी विस्मृति करा देनेवाली हाथीकी योनि उन्हें प्राप्त हुई। परन्तु भगवान्की आराधनाका ऐसा प्रभाव है कि हाथी होनेपर भी उन्हें भगवान्की स्मृति हो ही गयी॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.4.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 920) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/4/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)