श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.20.25

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

हृद्यङ्ग धर्मं स्तनयोर्मुरारे-

र्ऋतं च सत्यं च मनस्यथेन्दुम्।✎ 1120 1121

श्रियं च वक्षस्यरविन्दहस्तां

कण्ठे च सामानि समस्तरेफान्॥ २५

hṛdyaṅga dharmaṃ stanayormurāre-

r:ṛtaṃ ca satyaṃ ca manasyathendum|

śriyaṃ ca vakṣasyaravindahastāṃ

kaṇṭhe ca sāmāni samastarephān|| 25

अर्थ

उन लोगोंको भगवान्‌के हृदयमें धर्म, स्तनोंमें ऋत (मधुर) और सत्य वचन, मनमें चन्द्रमा, वक्षः-स्थलपर हाथोंमें कमल लिये लक्ष्मीजी, कण्ठमें सामवेद और सम्पूर्ण शब्दसमूह उन्हें दीखे॥ २५॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1120 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ऋर्तं → ऋर्ऋतं
  • #1121 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ऋर्ऋतं → र्ऋतं

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