श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.17.11

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

अदित्यैवं स्तुतो राजन्भगवान्पुष्करेक्षणः।

क्षेत्रज्ञः सर्वभूतानामिति होवाच भारत॥ ११

adityaivaṃ stuto rājanbhagavānpuṣkarekṣaṇaḥ|

kṣetrajñaḥ sarvabhūtānāmiti hovāca bhārata|| 11

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब अदितिने इस प्रकार कमलनयनभगवान्‌की स्तुति की, तब समस्त प्राणियोंके हृदयमें रहकर उनकी गति-विधि जाननेवाले भगवान्‌ने यह बात कही॥ ११॥✎ 773 774 1368

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #773 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #774 शब्दोंके बीचका स्थान: कमल-नयनभगवान् की → कमल-नयनभगवान्‌की
  • #1368 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): कमल-नयनभगवान्‌की → कमलनयनभगवान्‌की

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