श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.1

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

अथ पञ्चदशोऽध्यायः

राजा बलिकी स्वर्गपर विजय

राजोवाच

बलेः पदत्रयं भूमेः कस्माद्धरिरयाचत।

भूत्वेश्‍वरः कृपणवल्लब्धार्थोऽपि बबन्ध तम्॥ १

baleḥ padatrayaṃ bhūmeḥ kasmāddharirayācata|

bhūtveśvaraḥ kṛpaṇavallabdhārtho'pi babandha tam|| 1

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! श्रीहरि स्वयं ही सबके स्वामी हैं। फिर उन्होंने दीन-हीनकी भाँति राजा बलिसे तीन पग पृथ्वी क्यों माँगी? तथा जो कुछ वे चाहते थे, वह मिल जानेपर भी उन्होंने बलिको बाँधा क्यों?॥ १॥

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