श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.14.11

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

एतत् कल्पविकल्पस्य प्रमाणं परिकीर्तितम्।

यत्र मन्वन्तराण्याहुश्‍चतुर्दश पुराविदः॥ ११

etat kalpavikalpasya pramāṇaṃ parikīrtitam|

yatra manvantarāṇyāhuścaturdaśa purāvidaḥ|| 11

अर्थ

परीक्षित्! इस प्रकार मैंने तुम्हें महाकल्प और अवान्तर कल्पका परिमाण सुना दिया। पुराणतत्त्वके विद्वानोंने प्रत्येक अवान्तर कल्पमें चौदह मन्वन्तर बतलाये हैं॥ ११॥✎ 744 745 746

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामष्टमस्कन्धे चतुर्दशोऽध्यायः॥ १४॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #744 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #745 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #746 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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