॥ श्रीहरिः ॥
मनवो मनुपुत्राश्च मुनयश्च महीपते।
इन्द्राः सुरगणाश्चैव सर्वे पुरुषशासनाः॥ २
manavo manuputrāśca munayaśca mahīpate|
indrāḥ suragaṇāścaiva sarve puruṣaśāsanāḥ|| 2
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! मनु, मनुपुत्र, सप्तर्षि और देवता—सबको नियुक्त करनेवाले स्वयं भगवान् ही हैं॥ २॥
मनवो मनुपुत्राश्च मुनयश्च महीपते।
इन्द्राः सुरगणाश्चैव सर्वे पुरुषशासनाः॥ २
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! मनु, मनुपुत्र, सप्तर्षि और देवता—सबको नियुक्त करनेवाले स्वयं भगवान् ही हैं॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.14.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 972) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/14/2/