श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.14.3

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

यज्ञादयो याः कथिताः पौरुष्यस्तनवो नृप१।

मन्वादयो जगद्यात्रां नयन्त्याभिः प्रचोदिताः॥ ३

yajñādayo yāḥ kathitāḥ pauruṣyastanavo nṛpa|

manvādayo jagadyātrāṃ nayantyābhiḥ pracoditāḥ|| 3

अर्थ

राजन्! भगवान्‌के जिन यज्ञपुरुष आदि अवतारशरीरोंका वर्णन मैंने किया है, उन्हींकी प्रेरणासे मनु आदि विश्‍व-व्यवस्थाका संचालन करते हैं॥ ३॥✎ 744 745 746

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—नृपाः।

    (मुद्रित पृष्ठ 973)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #744 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #745 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #746 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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