॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.14.1
अथ चतुर्दशोऽध्यायः
मनु आदिके पृथक्-पृथक् कर्मोंका निरूपण
राजोवाच
मन्वन्तरेषु भगवन्यथा मन्वादयस्त्विमे।
यस्मिन्कर्मणि ये येन नियुक्तास्तद्वदस्व मे॥ १
manvantareṣu bhagavanyathā manvādayastvime|
yasminkarmaṇi ye yena niyuktāstadvadasva me|| 1
अर्थ
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! आपके द्वारा वर्णित ये मनु, मनुपुत्र, सप्तर्षि आदि अपने-अपने मन्वन्तरमें किसके द्वारा नियुक्त होकर कौन-कौन-सा काम किस प्रकार करते हैं—यह आप कृपा करके मुझे बतलाइये॥ १॥