श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.23

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

विष्वक्सेनो विषूच्यां तु शम्भोः सख्यं करिष्यति।

जातः स्वांशेन भगवान्गृहे विश्‍वसृजो विभुः॥ २३

viṣvakseno viṣūcyāṃ tu śambhoḥ sakhyaṃ kariṣyati|

jātaḥ svāṃśena bhagavāngṛhe viśvasṛjo vibhuḥ|| 23

अर्थ

विश्‍वसृज्की पत्‍नी विषूचिके गर्भसे भगवान् विष्वक्सेनके रूपमें अंशावतार ग्रहण करके शम्भु नामक इन्द्रसे मित्रता करेंगे॥ २३॥

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