श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.22

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

हविष्मान्सुकृतिः सत्यो जयो मूर्तिस्तदा द्विजाः।

सुवासनविरुद्धाद्या देवाः शम्भुः सुरेश्‍वरः॥ २२

haviṣmānsukṛtiḥ satyo jayo mūrtistadā dvijāḥ|

suvāsanaviruddhādyā devāḥ śambhuḥ sureśvaraḥ|| 22

अर्थ

दसवें मनु होंगे उपश्लोकके पुत्र ब्रह्मसावर्णि। उनमें समस्त सद‍्गुण निवास करेंगे। भूरिषेण आदि उनके पुत्र होंगे और हविष्मान्, सुकृति, सत्य, जय, मूर्ति आदि सप्तर्षि। सुवासन, विरुद्ध आदि देवताओंके गण होंगे और इन्द्र होंगे शम्भु॥ २१-२२॥

यह अर्थ श्लोक 21–22 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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