भगवान्ने देखा कि भगवान् शंकरको इससे विषाद या लज्जा नहीं हुई है, तब वे पुरुषशरीर धारण करके फिर प्रकट हो गये और बड़ी प्रसन्नतासे उनसे कहने लगे॥ ३७॥✎ 734735736737738
तमविक्लवमव्रीडमालक्ष्य मधुसूदनः।
उवाच परमप्रीतो बिभ्रत्स्वां पौरुषीं तनुम्॥ ३७
भगवान्ने देखा कि भगवान् शंकरको इससे विषाद या लज्जा नहीं हुई है, तब वे पुरुषशरीर धारण करके फिर प्रकट हो गये और बड़ी प्रसन्नतासे उनसे कहने लगे॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 967) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/12/37/