श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.38

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

दिष्ट्या त्वं विबुधश्रेष्ठ स्वां निष्ठामा३त्मना स्थितः।

यन्मे स्त्रीरूपया स्वैरं मोहितोऽप्यङ्ग मायया॥ ३८

diṣṭyā tvaṃ vibudhaśreṣṭha svāṃ niṣṭhāmātmanā sthitaḥ|

yanme strīrūpayā svairaṃ mohito'pyaṅga māyayā|| 38

अर्थ

श्रीभगवान्‌ने कहा—देवशिरोमणे! मेरी स्त्रीरूपिणी मायासे विमोहित होकर भी आप स्वयं ही अपनी निष्ठामें स्थित हो गये। यह बड़े ही आनन्दकी बात है॥ ३८॥✎ 739

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—मात्मनि।

    (मुद्रित पृष्ठ 967)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #739 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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