इसके बाद आत्मस्वरूप सर्वात्मा भगवान्की यह महिमा जानकर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ। वे जानते थे कि भला, भगवान्की शक्तियोंका पार कौन पा सकता है॥ ३६॥✎ 734735736737738
अथावगतमाहात्म्य आत्मनो जगदात्मनः।
अपरिज्ञेयवीर्यस्य न मेने तदु हाद्भुतम्॥ ३६
इसके बाद आत्मस्वरूप सर्वात्मा भगवान्की यह महिमा जानकर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ। वे जानते थे कि भला, भगवान्की शक्तियोंका पार कौन पा सकता है॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 967) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/12/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)