नमुचि अपराजितसे, अश्विनीकुमार वृषपर्वासे तथा सूर्यदेव बलिके बाण आदि सौ पुत्रोंसे युद्ध करने लगे॥ ३०॥✎ 1987
अपराजितेन नमुचिरश्विनौ वृषपर्वणा।
सूर्यो बलिसुतैर्देवो बाणज्येष्ठैः शतेन च॥ ३०
नमुचि अपराजितसे, अश्विनीकुमार वृषपर्वासे तथा सूर्यदेव बलिके बाण आदि सौ पुत्रोंसे युद्ध करने लगे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 954) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1987 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): महोदवजीकी → महादेवजीकी