॥ श्रीहरिः ॥
यमस्तु कालनाभेन विश्वकर्मा मयेन वै।
शम्बरो युयुधे त्वष्ट्रा सवित्रा तु विरोचनः॥ २९
yamastu kālanābhena viśvakarmā mayena vai|
śambaro yuyudhe tvaṣṭrā savitrā tu virocanaḥ|| 29
अर्थ
यमराज कालनाभसे, विश्वकर्मा मयसे, शम्बरासुर त्वष्टासे तथा सविता विरोचनसे लड़ने लगे॥ २९॥✎ 1987
यमस्तु कालनाभेन विश्वकर्मा मयेन वै।
शम्बरो युयुधे त्वष्ट्रा सवित्रा तु विरोचनः॥ २९
यमराज कालनाभसे, विश्वकर्मा मयसे, शम्बरासुर त्वष्टासे तथा सविता विरोचनसे लड़ने लगे॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 954) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1987 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): महोदवजीकी → महादेवजीकी