॥ श्रीहरिः ॥
युयोध बलिरिन्द्रेण तारकेण गुहोऽस्यत।
वरुणो हेतिनायुध्यन्मित्रो राजन्प्रहेतिना॥ २८
yuyodha balirindreṇa tārakeṇa guho'syata|
varuṇo hetināyudhyanmitro rājanprahetinā|| 28
अर्थ
बलि इन्द्रसे, स्वामिकार्तिक तारकासुरसे, वरुण हेतिसे और मित्र प्रहेतिसे भिड़ गये॥ २८॥✎ 1987
युयोध बलिरिन्द्रेण तारकेण गुहोऽस्यत।
वरुणो हेतिनायुध्यन्मित्रो राजन्प्रहेतिना॥ २८
बलि इन्द्रसे, स्वामिकार्तिक तारकासुरसे, वरुण हेतिसे और मित्र प्रहेतिसे भिड़ गये॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 954) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1987 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): महोदवजीकी → महादेवजीकी