नृसिंहभगवान्ने देखा कि नन्हा-सा बालक मेरे चरणोंके पास पड़ा हुआ है। उनका हृदय दयासे भर गया। उन्होंने प्रह्लादको उठाकर उनके सिरपर अपना वह करकमल रख दिया, जो कालसर्पसे भयभीत पुरुषोंको अभयदान करनेवाला है॥ ५॥✎ 618
स्वपादमूले पतितं तमर्भकं
विलोक्य देवः कृपया परिप्लुतः।
उत्थाप्य तच्छीर्ष्ण्यदधात् कराम्बुजं
कालाहिवित्रस्तधियां कृताभयम्॥ ५
नृसिंहभगवान्ने देखा कि नन्हा-सा बालक मेरे चरणोंके पास पड़ा हुआ है। उनका हृदय दयासे भर गया। उन्होंने प्रह्लादको उठाकर उनके सिरपर अपना वह करकमल रख दिया, जो कालसर्पसे भयभीत पुरुषोंको अभयदान करनेवाला है॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.9.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 857) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/9/5/
टिप्पणियाँ
२
प्रा० पा०—हिनिर्दष्टधि०।
(मुद्रित पृष्ठ 857)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#618 शब्दोंके बीचका स्थान: नृसिंहभगवान् ने → नृसिंहभगवान्ने