किम्पुरुषोंने कहा—हमलोग अत्यन्त तुच्छ किम्पुरुष हैं और आप सर्वशक्तिमान् महापुरुष हैं। जब सत्पुरुषोंने इसका तिरस्कार किया—इसे धिक्कारा, तभी आज आपने इस कुपुरुष—असुराधमको नष्ट कर दिया॥ ५३॥
वयं किम्पुरुषास्त्वं तु महापुरुष ईश्वरः।
अयं कुपुरुषो नष्टो धिक्कृतः साधुभिर्यदा॥ ५३
किम्पुरुषोंने कहा—हमलोग अत्यन्त तुच्छ किम्पुरुष हैं और आप सर्वशक्तिमान् महापुरुष हैं। जब सत्पुरुषोंने इसका तिरस्कार किया—इसे धिक्कारा, तभी आज आपने इस कुपुरुष—असुराधमको नष्ट कर दिया॥ ५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.8.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 855) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/8/53/