॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.8.37
तत्रोपव्रज्य विबुधा ब्रह्मेन्द्रगिरिशादयः।
ऋषयः पितरः सिद्धा विद्याधरमहोरगाः॥ ३७
tatropavrajya vibudhā brahmendragiriśādayaḥ|
ṛṣayaḥ pitaraḥ siddhā vidyādharamahoragāḥ|| 37
अर्थ
तात! इसी समय ब्रह्मा, इन्द्र, शंकर आदि देवता, ऋषि, पितर, सिद्ध, विद्याधर, महानाग, मनु, प्रजापति, गन्धर्व, अप्सराएँ, चारण, यक्ष, किम्पुरुष, वेताल, सिद्ध, किन्नर और सुनन्द-कुमुद आदि भगवान्के सभी पार्षद उनके पास आये। उन लोगोंने सिरपर अंजलि बाँधकर सिंहासनपर विराजमान अत्यन्त तेजस्वी नृसिंहभगवान्की थोड़ी दूरसे अलग-अलग स्तुति की॥ ३७—३९॥✎ 616