श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.36

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तदा विमानावलिभिर्नभस्तलं

दिदृक्षतां सङ्कुलमास नाकिनाम्।

सुरानका दुन्दुभयोऽथ जघ्निरे

गन्धर्वमुख्या ननृतुर्जगुः स्त्रियः॥ ३६

tadā vimānāvalibhirnabhastalaṃ

didṛkṣatāṃ saṅkulamāsa nākinām|

surānakā dundubhayo'tha jaghnire

gandharvamukhyā nanṛturjaguḥ striyaḥ|| 36

अर्थ

आकाशमें विमानोंसे आये हुए भगवान्‌के दर्शनार्थी देवताओंकी भीड़ लग गयी। देवताओंके ढोल और नगारे बजने लगे। गन्धर्वराज गाने लगे, अप्सराएँ नाचने लगीं॥ ३६॥✎ 616

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #616 शब्दोंके बीचका स्थान: नृसिंहभगवान् की → नृसिंहभगवान्‌की

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