श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.5.2

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तौ राज्ञा प्रापितं बालं प्रह्रादं नयकोविदम्।

पाठयामासतुः पाठ्यानन्यांश्चासुरबालकान्॥ २

tau rājñā prāpitaṃ bālaṃ prahrādaṃ nayakovidam|

pāṭhayāmāsatuḥ pāṭhyānanyāṃścāsurabālakān|| 2

अर्थ

नारदजी कहते हैं—युधिष्ठिर! दैत्योंने भगवान् श्रीशुक्राचार्यजीको अपना पुरोहित बनाया था। उनके दो पुत्र थे—शण्ड और अमर्क। वे दोनों राजमहलके पास ही रहकर हिरण्यकशिपुके द्वारा भेजे हुए नीतिनिपुण बालक प्रह्लादको और दूसरे पढ़ानेयोग्य दैत्य-बालकोंको राजनीति, अर्थनीति आदि पढ़ाया करते थे॥ १-२॥

यह अर्थ श्लोक 1–2 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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