श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.5.19

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तत एनं गुरुर्ज्ञात्वा ज्ञातज्ञेयचतुष्टयम्।

दैत्येन्द्रं दर्शयामास मातृमृष्टमलङ्कृतम्॥ १९

tata enaṃ gururjñātvā jñātajñeyacatuṣṭayam|

daityendraṃ darśayāmāsa mātṛmṛṣṭamalaṅkṛtam|| 19

अर्थ

कुछ समयके बाद जब गुरुजीने देखा कि प्रह्लादने साम, दान, भेद और दण्डके सम्बन्धकी सारी बातें जान ली हैं, तब वे उन्हें उनकी माके पास ले गये। माताने बड़े लाड़-प्यारसे उन्हें नहला-धुलाकर अच्छी तरह गहने कपड़ोंसे सजा दिया। इसके बाद वे उन्हें हिरण्यकशिपुके पास ले गये॥ १९॥

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