श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.5.18

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

इति तं विविधोपायैर्भीषयंस्तर्जनादिभिः।

प्रह्रादं ग्राहयामास त्रिवर्गस्योपपादनम् ॥ १८

iti taṃ vividhopāyairbhīṣayaṃstarjanādibhiḥ|

prahrādaṃ grāhayāmāsa trivargasyopapādanam || 18

अर्थ

इस प्रकार गुरुजीने तरह-तरहसे डाँट-डपटकर प्रह्लादको धमकाया और अर्थ, धर्म एवं कामसम्बन्धी शिक्षा दी॥ १८॥

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