श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.5.12

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

स यदानुव्रतः पुंसां पशुबुद्धिर्विभिद्यते।

अन्य एष तथान्योऽहमिति भेदगतासती॥ १२

sa yadānuvrataḥ puṃsāṃ paśubuddhirvibhidyate|

anya eṣa tathānyo'hamiti bhedagatāsatī|| 12

अर्थ

वे भगवान् ही जब कृपा करते हैं, तब मनुष्योंकी पाशविक बुद्धि नष्ट होती है। इस पशुबुद्धिके कारण ही तो ‘यह मैं हूँ और यह मुझसे भिन्‍न है’ इस प्रकारका झूठा भेदभाव पैदा होता है॥ १२॥✎ 585 586

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #585 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #586 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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