श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.4.3

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

ततो जगाम भगवानमोघानुग्रहो विभुः।

पूजितोऽसुरवर्येण स्तूयमानः प्रजेश्‍वरैः॥ ३

tato jagāma bhagavānamoghānugraho vibhuḥ|

pūjito'suravaryeṇa stūyamānaḥ prajeśvaraiḥ|| 3

अर्थ

[नारदजी कहते हैं—] ब्रह्माजीके वरदान कभी झूठे नहीं होते। वे समर्थ एवं भगवद्रूप ही हैं। वरदान मिल जानेके बाद हिरण्यकशिपुने उनकी पूजा की। तत्पश्चात् प्रजापतियोंसे अपनी स्तुति सुनते हुए वे अपने लोकको चले गये॥ ३॥✎ 581 2021

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #581 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #2021 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): ढि़ → ढ़ि

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