श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.4.2

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

ब्रह्मोवाच

तातेमे दुर्लभाः पुंसां यान् वृणीषे वरान् मम।

तथापि वितराम्यङ्ग वरान् यदपि दुर्लभान्॥ २

tāteme durlabhāḥ puṃsāṃ yān vṛṇīṣe varān mama|

tathāpi vitarāmyaṅga varān yadapi durlabhān|| 2

अर्थ

ब्रह्माजीने कहा—बेटा! तुम जो वर मुझसे माँग रहे हो, वे जीवोंके लिये बहुत ही दुर्लभ हैं; परन्तु दुर्लभ होनेपर भी मैं तुम्हें वे सब वर दिये देता हूँ॥ २॥

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