॥ श्रीहरिः ॥
इत्युक्त्वाऽऽदिभवो देवो भक्षिताङ्गं पिपीलिकैः।
कमण्डलुजलेनौक्षद्दिव्येनामोघराधसा ॥ २२
ityuktvā''dibhavo devo bhakṣitāṅgaṃ pipīlikaiḥ|
kamaṇḍalujalenaukṣaddivyenāmogharādhasā || 22
अर्थ
नारदजी कहते हैं—युधिष्ठिर! इतना कहकर ब्रह्माजीने उसके चींटियोंसे खाये हुए शरीरपर अपने कमण्डलुका दिव्य एवं अमोघ प्रभावशाली जल छिड़क दिया॥ २२॥
इत्युक्त्वाऽऽदिभवो देवो भक्षिताङ्गं पिपीलिकैः।
कमण्डलुजलेनौक्षद्दिव्येनामोघराधसा ॥ २२
नारदजी कहते हैं—युधिष्ठिर! इतना कहकर ब्रह्माजीने उसके चींटियोंसे खाये हुए शरीरपर अपने कमण्डलुका दिव्य एवं अमोघ प्रभावशाली जल छिड़क दिया॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.3.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 820) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/3/22/