श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.6

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सपत्नैर्घातितः क्षुद्रैर्भ्राता मे दयितः सुहृत्।

पार्ष्णिग्राहेण हरिणा समेनाप्युपधाव४नैः॥ ६

sapatnairghātitaḥ kṣudrairbhrātā me dayitaḥ suhṛt|

pārṣṇigrāheṇa hariṇā samenāpyupadhāvanaiḥ|| 6

अर्थ

तुम्हें यह ज्ञात है कि मेरे क्षुद्र शत्रुओंने मेरे परम प्यारे और हितैषी भाईको विष्णुसे मरवा डाला है। यद्यपि वह देवता और दैत्य दोनोंके प्रति समान है, तथापि दौड़-धूप और अनुनय-विनय करके देवताओंने उसे अपने पक्षमें कर लिया है॥ ६॥✎ 580

टिप्पणियाँ

  1. ४

    प्रा० पा०—पधारितैः।

    (मुद्रित पृष्ठ 811)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #580 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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