अनेक विषयोंके ज्ञाता, शंकाओंका समाधान करके चित्तमें शास्त्रोक्त अर्थको बैठा देनेवाले और विद्वत्सभाओंके सभापति बड़े-बड़े विद्वान् भी असन्तोषके कारण गिर जाते हैं॥ २१॥
पण्डिता बहवो राजन्बहुज्ञाः संशयच्छिदः।
सदसस्पतयोऽप्येके असन्तोषात् पतन्त्यधः॥ २१
अनेक विषयोंके ज्ञाता, शंकाओंका समाधान करके चित्तमें शास्त्रोक्त अर्थको बैठा देनेवाले और विद्वत्सभाओंके सभापति बड़े-बड़े विद्वान् भी असन्तोषके कारण गिर जाते हैं॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.15.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 896) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/15/21/