॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.14.6
ज्ञातयः पितरौ पुत्रा भ्रातरः सुहृदोऽपरे।
यद् वदन्ति यदिच्छन्ति चानुमोदेत निर्ममः॥ ६
jñātayaḥ pitarau putrā bhrātaraḥ suhṛdo'pare|
yad vadanti yadicchanti cānumodeta nirmamaḥ|| 6
अर्थ
माता-पिता, भाई-बन्धु, पुत्र-मित्र, जातिवाले और दूसरे जो कुछ कहें अथवा जो कुछ चाहें, भीतरसे ममता न रखकर उनका अनुमोदन कर दे॥ ६॥