यदि अपनेको अधिकार आदि यज्ञके लिये आवश्यक सब वस्तुएँ प्राप्त हों तो बड़े-बड़े यज्ञ या अग्निहोत्र आदिके द्वारा भगवान्की आराधना करनी चाहिये॥ १६॥✎ 638
यर्ह्यात्मनोऽधिकाराद्याः सर्वाः स्युर्यज्ञसम्पदः।
वैतानिकेन विधिना अग्निहोत्रादिना यजेत्॥ १६
यदि अपनेको अधिकार आदि यज्ञके लिये आवश्यक सब वस्तुएँ प्राप्त हों तो बड़े-बड़े यज्ञ या अग्निहोत्र आदिके द्वारा भगवान्की आराधना करनी चाहिये॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.14.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 890) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/14/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)