श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.13.31

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

पश्यामि धनिनां क्लेशं लुब्धानामजितात्मनाम्।

भयादलब्धनिद्राणां सर्वतोऽभिविशङ्किनाम्॥ ३१

paśyāmi dhanināṃ kleśaṃ lubdhānāmajitātmanām|

bhayādalabdhanidrāṇāṃ sarvato'bhiviśaṅkinām|| 31

अर्थ

लोभी और इन्द्रियोंके वशमें रहनेवाले धनियोंका दुःख तो मैं देखता ही रहता हूँ। भयके मारे उन्हें नींद नहीं आती। सबपर उनका सन्देह बना रहता है॥ ३१॥

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